Monday, October 19, 2026
Home ब्लॉग योजनाओं में भ्रष्टाचार तो अपने पाँव पसारता ही है

योजनाओं में भ्रष्टाचार तो अपने पाँव पसारता ही है

विनीत नारायण
आज की सूचना क्रान्ति के दौर में ऐसी चोरी पकडऩा बायें हाथ का खेल है। उपग्रह सर्वेक्षणों से हर परियोजना के क्रियान्वयन पर पूरी नजर रखी जा सकती है और काफी हदतक चोरी पकड़ी जा सकती है। पर चोरी पकडऩे का काम नौकरशाही का कोई सदस्य करेगा तो अनेक कारणों से सच्चाई छिपा देगा। निगरानी का यही काम देशभर में अगर प्रतिष्ठित स्वयंसेवी संगठनों या व्यक्तियों से करवाया जाये तो चोरी रोकने में पूरी नहीं तो काफी सफलता मिलेगी।

केंन्द्र सरकार बंजर भूमि, मरूभूमि व सूखे क्षेत्र को हरा-भरा बनाने के लिए हजारों करोड़ रूपया प्रान्तीय सरकारों को देती आई है। मगर जिले के अधिकारी और नेता मिलीभगत इसका बड़ा पैसा डकार जाते हैं। झूठे आंकड़े प्रान्त सरकार के माध्यम से केन्द्र सरकार को भेज दिये जाते हैं पर इस विषय के जानकारों को कागजी आंकड़ों से गुमराह नहीं किया जा सकता। आज हम उपग्रह कैमरे से हर राज्य की जमीन का चित्र देख कर यह सुनिश्चित कर सकते हैं कि जहां-जहां सूखी जमीन को हरी करने के दावे किये गये, वो सब कितने सच्चे हैं।
दरअसल यह कोई नई बात नहीं है। विकास योजनाओं के नाम पर हजारों करोड़ रूपया इसी तरह वर्षों से प्रान्तीय सरकारों द्वारा पानी की तरह बहाया जाता है। पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गाँधी का यह जुमला अब पुराना पड़ गया कि केन्द्र के भेजे एक रूपये मे से केवल 14 पैसे जनता तक पहुंचते हैं। सूचना का अधिकार कानून भी जनता को यह नहीं बता पायेगा कि उसके इर्द-गिर्द की एक गज जमीन पर, पिछले 70 वर्षों में कितने करोड़ रूपये का विकास किया जा चुका है।

सडक़ निर्माण हो या सीवर, वृक्षारोपण हो या कुण्डों की खुदाई, नलकूपों की योजना हो या बाढ़ नियन्त्रण, स्वास्थ्य सेवाऐं हों या शिक्षा का अभियान की अरबों-खरबों रूपया कागजों पर खर्च हो चुका है। पर देश के हालात कछुए की गति से भी नहीं सुधर रहे। जनता दो वख्त की रोटी के लिए जूझ रही है और नौकरशाही, नेता व माफिया हजारो गुना तरक्की कर चुके है। जो भी इस क्लब का सदस्य बनता है, कुछ अपवादों को छोडक़र, दिन दूनी रात चौगुनी तरक्की करता है। केन्द्रीय सतर्कता आयोग, सीबीआई, लोकपाल व अदालतें उसका बाल भी बाकां नहीं कर पाते।

जिले में योजना बनाने वाले सरकारीकर्मी योजना इस दृष्टि से बनाते हैं कि काम कम करना पड़े और कमीशन तगड़ा मिल जाये। इन्हें हर दल के स्थानीय विधायकों और सांसदों का संरक्षण मिलता है। इसलिए यह नेता आए दिन बड़ी-बड़ी योजनाओं की अखबारों में घोषणा करते रहते है। अगर इनकी घोषित योजनाओं की लागत और मौके पर हुए काम की जांच करवा ली जाये तो दूध का दूध और पानी का पानी सामने आ जायेगा। यह काम मीडिया को करना चाहिए था। पहले करता भी था।

पर अब नेता पर कॉलम सेन्टीमीटर की दर पर छिपा भुगतान करके बड़े-बड़े दावों वाले अपने बयान स्थानीय अखबारों में प्रमुखता से छपवाते रहते है। जो लोग उसी इलाके में ठोस काम करते है, उनकी खबर खबर नहीं होती पर फज़ऱ्ीवाड़े के बयान लगातार धमाकेदार छपते है।

इन भ्रष्ट अफ़सरों और निर्माण कम्पनियों का भांडा तब फूटता है जब लोकार्पण के कुछ ही दिनों बाद अरबों रुपए की लागत से बने राजमार्ग या एक्सप्रेस-वे गुणवत्ता की कमी के चलते या तो धँस जाते हैं या बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो जाते हैं। ऐसा नहीं है कि ऐसी धांधली केवल सडक़ मार्गों पर ही होती है। ऐसा भी देखने को मिला है जब रेल की पटरियाँ भी धँस गई और रेल दुर्घटना हुई।

उधर जिले से लेकर प्रान्त तक और प्रान्त से लेकर केन्द्र तक प्रोफेशनल कन्सलटेन्ट का एक बड़ा तन्त्र खड़ा हो गया है। यह कन्सलटेन्ट सरकार से अपनी औकात से दस गुनी फीस वसूलते है और उसमें से 90 फीसदी तक काम देने वाले अफसरों और नेताओं को पीछे से कमीशन मे लौटा देते है। बिना क्षेत्र का सर्वेक्षण किये, बिना स्थानीय अपेक्षाओं को जाने, बिना प्रोजेक्ट की सफलता का मूल्यांकन किये केवल ख़ानापूर्ति के लिए डीपीआर (विस्तृत कार्य योजना) बना देते है। फिर चाहे जे.एन.आर.यू.एम. हो या मनरेगा, पर्यटन विभाग की डीपीआर हो या ग्रामीण विकास की सबमें फज़ऱ्ीवाड़े का प्रतिशत काफी ऊँचा रहता है। यही वजह है कि योजनाएँ खूब बनती है, पैसा भी खूब आता है, पर हालात नहीं सुधरते।

आज की सूचना क्रान्ति के दौर में ऐसी चोरी पकडऩा बायें हाथ का खेल है। उपग्रह सर्वेक्षणों से हर परियोजना के क्रियान्वयन पर पूरी नजर रखी जा सकती है और काफी हदतक चोरी पकड़ी जा सकती है। पर चोरी पकडऩे का काम नौकरशाही का कोई सदस्य करेगा तो अनेक कारणों से सच्चाई छिपा देगा। निगरानी का यही काम देशभर में अगर प्रतिष्ठित स्वयंसेवी संगठनों या व्यक्तियों से करवाया जाये तो चोरी रोकने में पूरी नहीं तो काफी सफलता मिलेगी।

ग्रामीण विकास के मंत्री ही नहीं बल्कि हर मंत्री को तकनीकी क्रान्ति की मदद लेनी चाहिए। योजना बनाने में आपाधापी को रोकने के लिए सरल तरीका है कि जिलाधिकारी अपनी योजनाएँ वेबसाइट पर डाल दें और उनपर जिले की जनता से 15 दिन के भीतर आपत्ति और सुझाव दर्ज करने को कहें। जनता के सही सुझावों पर अमल किया जाये। केवल सार्थक, उपयोगी और ठोस योजनाएँ ही केन्द्र सरकार व राज्य को भेजी जाये।

योजनाओं के क्रियान्वयन की साप्ताहिक प्रगति के चित्र भी वेबसाइट पर डाले जायें। जिससे उसकी कमियां जागरूक नागरिक उजागर कर सकें। इससे आम जनता के बीच इन योजनाओं पर हर स्तर पर नजर रखने में मदद मिलेगी और अपना लोकतन्त्र मजबूत होगा। फिर बाबा रामदेव या अन्ना हजारे जैसे लोगों को सरकारों के विरुद्ध जनता को जगाने की जरूरत नहीं पड़ेगी।

आज हर सरकार की विश्वसनीयता, चाहें वो केन्द्र की हो या प्रान्तों की, जनता की निगाह में काफी गिर चुकी है और अगर यही हाल रहे तो हालत और भी बिगड़ जायेगी। देश और प्रान्त की सरकारों को अपनी पूरी सोच और समझ बदलनी पड़ेगी। देशभर में जिस भी अधिकारी, विशेषज्ञ, प्रोफेशनल या स्वयंसेवी संगठन ने जिस क्षेत्र में भी अनुकरणीय कार्य किया हो, उसकी सूचना जनता के बीच, सरकारी पहल पर, बार-बार, प्रसारित की जाये। इससे देश के बाकी हिस्सों को भी प्रेरणा और ज्ञान मिलेगा।

फिर सात्विक शक्तियां बढ़ेंगी और देश का सही विकास होगा। अभी भी सुधार की गुंजाइश है। लक्ष्य पूर्ति के साथ गुणवत्ता पर ध्यान दिया जाए। यह तो आने वाला समय ही बताएगा कि इन घोषणाओं के चलते किए गए ये दावे गुणवत्ता के पैमाने पर कितने खरे उतरते हैं? चूँकि ऐसी योजनाओं में भ्रष्टाचार तों अपने पाँव पसारता ही है? ऐसे में जनहित का दावा करने वाले नेता क्या वास्तव में जनहित करे पाएँगे?

RELATED ARTICLES

आधुनिकता के अनेक सार्थक पक्ष भी हैं जो समाज को बेहतर बनाते हैं

भारत डोगरा आधुनिक समाज में अनेक स्तरों पर जटिलताएं बढ़ रही हैं। तकनीकी बदलाव तेजी से हो रहे हैं, और सामान्य जनजीवन पर उनका असर...

दक्षेस से भारत को सतर्क रहने की जरूरत

डॉ. ब्रह्मदीप अलूने महाशक्तियों की राजनीतिक और आर्थिक महत्त्वाकांक्षाओं ने तीसरी दुनिया के उभरने की संभावनाओं को सुनियोजित तरीके से खत्म कर दिया है। इसका...

एक अच्छे, भले और नेक प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह

हरिशंकर व्यास शीर्षक चौंका सकता है। पर जरा समकालीन भारत अनुभवों और उनकी दिशा में झांके तो अगले बीस-पच्चीस वर्षों की क्या भारत संभावना दिखेगी?...

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

- Advertisment -



Most Popular

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने प्रदेशवासियों को दी विजयदशमी एवं दशहरा पर्व की शुभकामनाएं

देहरादून। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने प्रदेशवासियों को विजयदशमी एवं दशहरा पर्व की हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं दी हैं। विजयदशमी की पूर्व संध्या पर...

महाराज ने की नवनियुक्त राज्यपाल से शिष्टाचार भेंट

देहरादून। प्रदेश के कैबिनेट मंत्री सतपाल महाराज ने लोक भवन पहुंचकर प्रदेश के नवनियुक्त राज्यपाल डॉ. ढाल सिंह बिसेन से शिष्टाचार भेंट कर उन्हें...

मुख्यमंत्री ने 20.55 करोड़ रुपये की पांच योजनाओं का किया शिलान्यास एवं लोकार्पण

विश्वविद्यालय परिसर में प्रशासनिक भवन, एम्फीथिएटर एवं नक्षत्र वाटिका का होगा निर्माण चिकित्सा शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाओं को सुदृढ़ बनाने के लिए राज्य सरकार निरंतर...

एशियाई पैरा खेलों में भारत का जलवा, मोना अग्रवाल ने जीता गोल्ड तो अवनि लेखरा को मिला सिल्वर

सिर्फ 0.4 अंक से चूकीं अवनि लेखरा नई दिल्ली। भारत की दो स्टार पैरा निशानेबाजों मोना अग्रवाल और अवनि लेखरा ने 2026 एशियाई पैरा खेलों...

Recent Comments

fapjunk
Antalya escort Antalya escort Belek escort
Antalya escort Antalya escort Belek escort
Ankara Escort
porn
Spanish to English translation is the process of converting written or spoken content from the Spanish language into the English language. With Spanish being one of the most widely spoken languages in the world, the need for accurate and efficient translation services is essential. Spanish to English translation plays a crucial role in various domains, including business, education, travel, literature, and more. Skilled translators proficient in both Spanish and English are required to ensure accurate and culturally appropriate translations. They must possess a deep understanding of both languages' grammar, syntax, idioms, and cultural nuances to convey the original meaning and intent of the source content effectively. Quality Spanish to English translation services help bridge the language barrier and facilitate effective communication between Spanish-speaking individuals and English-speaking audiences.spanishenglish.com
Spanish to English translation is the process of converting written or spoken content from the Spanish language into the English language. With Spanish being one of the most widely spoken languages in the world, the need for accurate and efficient translation services is essential. Spanish to English translation plays a crucial role in various domains, including business, education, travel, literature, and more. Skilled translators proficient in both Spanish and English are required to ensure accurate and culturally appropriate translations. They must possess a deep understanding of both languages' grammar, syntax, idioms, and cultural nuances to convey the original meaning and intent of the source content effectively. Quality Spanish to English translation services help bridge the language barrier and facilitate effective communication between Spanish-speaking individuals and English-speaking audiences.spanishenglish.com
uluslararası zati eşya taşımacılığı türkiyeden almanyaya ev taşıma uluslararası evden eve nakliyat türkiyeden kıbrısa evden eve nakliyat türkiyeden kıbrısa ev taşıma fiyatları türkiyeden ingiltereye evden eve nakliyat yurtdışına ev taşıma zati eşya taşımacılığı
Evden eve nakliyat şehirler arası nakliyat