Wednesday, October 21, 2026
Home ब्लॉग भाजपा को अपनी रणनीति पर सोचना होगा

भाजपा को अपनी रणनीति पर सोचना होगा

अजीत द्विवेदी
कर्नाटक के चुनाव नतीजों की जैसी व्याख्या भाजपा कर रही है या कम से कम उसके प्रवक्ता टेलीविजन की बहसों और सोशल मीडिया के विमर्श में जिस तरह से इसका बचाव कर रहे हैं वह भाजपा के लिए आत्मघाती हो सकता है। यह सही है कि उसने अपना वोट नहीं गंवाया है। वह अपना पारंपरिक 36 फीसदी वोट बचाए रखने में कामयाब रही है। लेकिन उसे समझना होगा कि यह वोट उसकी जीत की गारंटी नहीं है। त्रिकोणात्मक चुनाव में इतने वोट पर चुनाव जीता जा सकता है लेकिन किसी भी राज्य में आमने सामने के चुनाव में यह आंकड़ा बहुत कम है। कर्नाटक की तीसरी पार्टी जेडीएस ने पांच फीसदी वोट गंवाए तो कांग्रेस को भाजपा से 70 सीट ज्यादा मिल गई। भाजपा और कांग्रेस में सात फीसदी वोट का अंतर है लेकिन कांग्रेस को उससे दोगुने से ज्यादा सीटें मिली हैं। इसलिए 36 फीसदी वोट मिलने के नाम पर हर रणनीति का बचाव करना ठीक नहीं है। भाजपा को इस चुनाव से सबक लेना होगा और राजनीतिक मुद्दों से लेकर संगठन तक में अब तक आजमाए जा चुके नुस्खों पर नए सिरे से विचार करना होगा।

मिसाल के तौर पर भाजपा का चुनाव जीतने का एक नुस्खा यह है कि चुनाव से पहले मुख्यमंत्री बदल दो, मंत्रियों को बदल दो, ज्यादा से ज्यादा विधायकों की टिकट काट दो और नए चेहरों को मैदान में उतारो। कुछ राज्यों में यह रणनीति कारगर रही है लेकिन यह कोई रामबाण नुस्खा नहीं है, जो हर जगह काम करेगा। उत्तराखंड और गुजरात में यह योजना सफल रही थी लेकिन कर्नाटक में यह रणनीति पिट गई। भाजपा ने उम्र के हवाले बीएस येदियुरप्पा को मुख्यमंत्री पद से हटाया था। उसको लग रहा था कि येदियुरप्पा को हटाने से उनके ऊपर लगे भ्रष्टाचार के आरोपों से भाजपा को मुक्ति मिल जाएगी, एंटी इन्कम्बैंसी भी खत्म हो जाएगी और नया चेहरा होने से लोगों में उम्मीद बंधेंगी। इस रणनीति पर अमल करते हुए भाजपा को यह ध्यान रखना चाहिए था कि येदियुरप्पा की जगह जो चेहरा लाया जा रहा है वह कितना लोकप्रिय है। इसी तरह एंटी इन्कम्बैंसी कम करने के लिए विधायकों या पूर्व प्रत्याशियों की टिकट काटी गई और राज्य की 224 में से 72 सीटों पर नए चेहरे उतारे गए। इन 72 में से 62 नए चेहरे चुनाव हार गए हैं। जाहिर है सिर्फ चेहरा बदलना पर्याप्त नहीं है। नया चेहरा कितना दमदार है यह ज्यादा अहम है।

लेकिन भाजपा इस पर विचार इसलिए नहीं करती है क्योंकि उसे लगता है कि एक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का चेहरा ही काफी है, किसी दूसरे दमदार चेहरे की जरूरत नहीं है। इस सोच की सीमाएं भी कर्नाटक में दिखाई दे गई हैं। प्रधानमंत्री का चेहरा दांव पर लगाने के बावजूद भाजपा वहां कुछ नहीं कर पाई। प्रधानमंत्री का चेहरा भाजपा के काम नहीं आया क्योंकि स्थानीय स्तर पर जो चेहरे थे लोग उनसे नाराज थे। मोदी के चेहरे पर चुनाव लडऩे और जीतने के भरोसे में भाजपा ने अपने कई मजबूत नेताओं को किनारे किए, जिससे स्थानीय लोगों में नाराजगी बढ़ी। उनको अपना मुख्यमंत्री चुनना था, जबकि प्रचार गुजरात और उत्तर प्रदेश के नेताओं के चेहरे पर हो रहा था। कर्नाटक जैसे भाषायी अस्मिता वाले राज्य की संवेदनशीलता का जरा भी ध्यान रखा गया होता तो राष्ट्रीय और प्रादेशिक नेताओं के चेहरों का एक संतुलन बनाने का प्रयास होता। भाजपा को समझना होगा कि निराकार चेहरों को आगे करके हर जगह मोदी के नाम पर चुनाव नहीं जीता जा सकता है।

इसी तरह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने डबल इंजन की सरकार का एक नैरेटिव बनाया है। सोचें, देश में दशकों तक केंद्र और राज्यों में कांग्रेस की ही सरकारें होती थीं लेकिन तब किसी ने विकास के लिए दोनों जगह एक ही पार्टी की सरकार होने यानी डबल इंजन की सरकार की जरूरत नहीं बताई। लेकिन अब हर जगह डबल इंजन की सरकार की जरूरत बताई जाती है। इसके अगर कुछ फायदे हैं तो नुकसान भी है। डबल इंजन की सरकार डबल एंटी इन्कम्बैंसी भी लाती है। उसकी विफलताएं भी दोहरी हो जाती हैं। लोगों का काम नहीं होता है या उनकी मुश्किलें बढ़ती हैं तो उनकी नाराजगी भी दोहरी होती है। वे डबल इंजन की सरकार को डबल फेल यानी दोगुना अक्षम मानने को मजबूर होते हैं। इससे उनका गुस्सा भी डबल होता है और वे दोहरे जोश के साथ नया विकल्प आजमाते हैं। कम से कम कर्नाटक में तो यही देखने को मिला है।

कर्नाटक नतीजों के बाद भाजपा को अपने चुनावी एजेंडे के बारे में भी गंभीरता से सोचना होगा। उसे समझना होगा कि हिंदुत्व या सांप्रदायिक ध्रुवीकरण कराने वाले एजेंडे की भी एक सीमा होती है या उसकी भी एक्सपायरी डेट होती है। हर जगह और हर समय यह एजेंडा नहीं चल सकता है। हो सकता है कि सांप्रदायिक रूप से बहुत संवेदनशील राज्यों में या उत्तर, पश्चिम भारत के राज्यों में यह एजेंडा चले क्योंकि लंबे समय तक मंदिर-मस्जिद और जाति की राजनीति की वजह से इन राज्यों के नौजवानों अपनी आकांक्षाएं गवां चुके हैं या उनकी कोई आकांक्षा कभी पनपी ही नहीं है। लेकिन कर्नाटक जैसे आकांक्षी राज्य में, जिसकी राजधानी बेंगलुरू एक समय एशिया के सिलिकॉन वैली की तरह उभरी थी वहां हिजाब पर पाबंदी, हलाल मीट का विरोध, टीपू सुल्तान को किसने मारा की बहस, लव जिहाद की बहस, बजरंग दल का बचाव करना जैसे मुद्दों पर चुनाव लडऩा कोई समझदारी की बात नहीं थी। यह तो कर्नाटक की बात है लेकिन दूसरे राज्यों में भी विभाजनकारी मुद्दे सोच समझ कर उठाने होंगे। एक समय के बाद रोजी रोटी का मसला इन मुद्दों को दबा सकता है।

भाजपा को बड़ी गंभीरता से इस बात पर सोचना होगा कि भ्रष्टाचार पर सिर्फ बात करने से काम नहीं चलेगा और सिर्फ विपक्षी पार्टियों के नेताओं पर केंद्रीय एजेंसियों से छापे मरवा कर उनको भ्रष्ट साबित करने की रणनीति भी हर समय कारगर नहीं हो सकती है। इस तरह की राजनीति की भी सीमा है। अति की हर जगह वर्जना बताई गई है। कर्नाटक में भाजपा की सरकार के ऊपर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगे लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। लोगों ने राजनीति से निरपेक्ष लोगों के मुंह से 40 फीसदी कमीशन मांगे जाने के आरोप सुने और उन पर भरोसा किया। लोगों ने देखा कि भाजपा विधायक के यहां से आठ करोड़ रुपए नकद पकड़े गए। विधायक के बेटे को रिश्वत मांगने के आरोप में पकड़ा गया। लोगों ने यह भी देखा था कि च्ऑपरेशन कमलज् के तहत कैसे कांग्रेस के विधायकों को तोड़ा गया। क्या लोग नहीं समझते हैं कि टूटने वाले विधायकों को किसी न किसी तरह का लालच दिया जाता है? यह भी तो भ्रष्टाचार का एक रूप है! यह अनैतिक भी है और भ्रष्ट आचरण भी है। इसके अत्यधिक प्रयोग ने भाजपा की छवि को प्रभावित किया है। लोगों को यह सोचने के लिए मजबूर किया है कि ऐसे काम कर तो भाजपा रही है लेकिन कार्रवाई विपक्षी नेताओं के खिलाफ हो रही है।

प्रचार और पैसा चुनाव लडऩे का टूल्स हैं, सिर्फ इनके दम पर भी चुनाव नहीं जीता जा सकता है। भाजपा को यह भी ध्यान में रखना होगा। अगर लोग प्रादेशिक सरकारों के कामकाज से नाराज हैं तो केंद्रीय सरकार के वादे से वह नाराजगी खत्म नहीं हो सकती है। पैसे और प्रचार के दम पर लोगों को चाहे जो भी समझाने का प्रयास हो, उससे नाराजगी दूर नहीं होती है। कर्नाटक में लोग सरकार के कामकाज से नाराज थे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से हो सकता है कि उनकी नाराजगी नहीं हो लेकिन वे जानते थे कि मोदी को मुख्यमंत्री नहीं बनना है। इसलिए प्रधानमंत्री के इतने सघन प्रचार और भावनात्मक अपील पर भी लोगों ने ध्यान नहीं दिया। सो, भाजपा के लिए एक बड़ा सबक यह है कि वह राज्यों में सरकारों को अच्छा काम करने के लिए प्रेरित करे। इस भरोसे में न रहे कि आखिरी दौर में मोदी आएंगे और सब कुछ बदल देंगे।

RELATED ARTICLES

आधुनिकता के अनेक सार्थक पक्ष भी हैं जो समाज को बेहतर बनाते हैं

भारत डोगरा आधुनिक समाज में अनेक स्तरों पर जटिलताएं बढ़ रही हैं। तकनीकी बदलाव तेजी से हो रहे हैं, और सामान्य जनजीवन पर उनका असर...

दक्षेस से भारत को सतर्क रहने की जरूरत

डॉ. ब्रह्मदीप अलूने महाशक्तियों की राजनीतिक और आर्थिक महत्त्वाकांक्षाओं ने तीसरी दुनिया के उभरने की संभावनाओं को सुनियोजित तरीके से खत्म कर दिया है। इसका...

एक अच्छे, भले और नेक प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह

हरिशंकर व्यास शीर्षक चौंका सकता है। पर जरा समकालीन भारत अनुभवों और उनकी दिशा में झांके तो अगले बीस-पच्चीस वर्षों की क्या भारत संभावना दिखेगी?...

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

- Advertisment -



Most Popular

नौ स्थानों पर 4G मोबाइल सेवा शुरू कराने की पहल, सांसद अजय भट्ट ने केंद्रीय मंत्री को लिखा पत्र

सर्वेक्षण पूरा, नौ प्रस्तावित स्थलों पर 4G नेटवर्क को जल्द मंजूरी देने की मांग हल्द्वानी। नैनीताल-ऊधमसिंह नगर के सांसद एवं पूर्व केंद्रीय रक्षा व पर्यटन...

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने प्रदेशवासियों को दी विजयदशमी एवं दशहरा पर्व की शुभकामनाएं

देहरादून। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने प्रदेशवासियों को विजयदशमी एवं दशहरा पर्व की हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं दी हैं। विजयदशमी की पूर्व संध्या पर...

महाराज ने की नवनियुक्त राज्यपाल से शिष्टाचार भेंट

देहरादून। प्रदेश के कैबिनेट मंत्री सतपाल महाराज ने लोक भवन पहुंचकर प्रदेश के नवनियुक्त राज्यपाल डॉ. ढाल सिंह बिसेन से शिष्टाचार भेंट कर उन्हें...

मुख्यमंत्री ने 20.55 करोड़ रुपये की पांच योजनाओं का किया शिलान्यास एवं लोकार्पण

विश्वविद्यालय परिसर में प्रशासनिक भवन, एम्फीथिएटर एवं नक्षत्र वाटिका का होगा निर्माण चिकित्सा शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाओं को सुदृढ़ बनाने के लिए राज्य सरकार निरंतर...

Recent Comments

fapjunk
Antalya escort Antalya escort Belek escort
Antalya escort Antalya escort Belek escort
Ankara Escort
porn
Spanish to English translation is the process of converting written or spoken content from the Spanish language into the English language. With Spanish being one of the most widely spoken languages in the world, the need for accurate and efficient translation services is essential. Spanish to English translation plays a crucial role in various domains, including business, education, travel, literature, and more. Skilled translators proficient in both Spanish and English are required to ensure accurate and culturally appropriate translations. They must possess a deep understanding of both languages' grammar, syntax, idioms, and cultural nuances to convey the original meaning and intent of the source content effectively. Quality Spanish to English translation services help bridge the language barrier and facilitate effective communication between Spanish-speaking individuals and English-speaking audiences.spanishenglish.com
Spanish to English translation is the process of converting written or spoken content from the Spanish language into the English language. With Spanish being one of the most widely spoken languages in the world, the need for accurate and efficient translation services is essential. Spanish to English translation plays a crucial role in various domains, including business, education, travel, literature, and more. Skilled translators proficient in both Spanish and English are required to ensure accurate and culturally appropriate translations. They must possess a deep understanding of both languages' grammar, syntax, idioms, and cultural nuances to convey the original meaning and intent of the source content effectively. Quality Spanish to English translation services help bridge the language barrier and facilitate effective communication between Spanish-speaking individuals and English-speaking audiences.spanishenglish.com
uluslararası zati eşya taşımacılığı türkiyeden almanyaya ev taşıma uluslararası evden eve nakliyat türkiyeden kıbrısa evden eve nakliyat türkiyeden kıbrısa ev taşıma fiyatları türkiyeden ingiltereye evden eve nakliyat yurtdışına ev taşıma zati eşya taşımacılığı
Evden eve nakliyat şehirler arası nakliyat