Thursday, October 22, 2026
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​अपराध का स्वरूप भले ही बदला हो, कानून अब और भी सख्त, बेटियां डरें नहीं, आवाज उठाएं- कुसुम कंडवाल

​मोदी-धामी के नेतृत्व में नारी शक्ति बन रही आत्मनिर्भर, डिजिटल सुरक्षा से ही संभव होगा विकसित भारत का संकल्प : कुसुम

​टनकपुर में राष्ट्रीय एवं राज्य महिला आयोग के संयुक्त तत्वावधान में स्टॉकिंग व साइबर स्टॉकिंग रोकथाम पर एक दिवसीय प्रशिक्षण कार्यशाला आयोजित

​स्मार्टफोन के साथ ‘स्मार्ट बिहेवियर’ भी जरूरी”: महिला आयोग की कार्यशाला में विशेषज्ञों ने सिखाए साइबर सुरक्षा, मानसिक स्वास्थ्य और कानूनी संरक्षण के गुर

टनकपुर। राष्ट्रीय महिला आयोग के सहयोग से उत्तराखण्ड राज्य महिला आयोग द्वारा आज डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम राजकीय प्रौद्योगिकी संस्थान, टनकपुर जनपद चम्पावत के सभागार में स्टॉकिंग एवं साइबर स्टॉकिंग से रोकथाम सम्बन्धी जागरूकता कार्यशाला विषयक एक दिवसीय विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ अतिथियों द्वारा दीप प्रज्ज्वलन कर किया गया। कार्यक्रम का मंच संचालन कल्पना आर्य द्वारा किया गया।

​कार्यशाला की अध्यक्षता करते हुए उत्तराखण्ड राज्य महिला आयोग अध्यक्ष कुसुम कंडवाल ने अपने संबोधन में कहा कि यह आयोजन केवल एक औपचारिक कार्यशाला नहीं, बल्कि नारी सुरक्षा, नारी सम्मान और डिजिटल स्वाभिमान का जनसंकल्प है। उन्होंने कहा कि आधुनिक तकनीकी युग में कानून-व्यवस्था सुदृढ़ हुई है, लेकिन डिजिटल दुनिया में अपराध का स्वरूप भी बदल गया है, पहले पीछा गलियों में होता था, आज मोबाइल की स्क्रीन पर होता है। पहले धमकी आमने-सामने दी जाती थी, आज फर्जी प्रोफाइल से दी जाती है। पहले बदनामी मोहल्ले तक सीमित थी, आज एक क्लिक में पूरी दुनिया तक पहुँच जाती है।

उन्होंने कहा कि अपराध का स्वरूप भले ही बदला हो, कानून अब और भी सख्त है, उन्होंने उपस्थित छात्राओं व मातृशक्ति का आह्वान करते हुए स्पष्ट कहा कि “न्याय का पहला कदम डर नहीं, बल्कि आवाज़ उठाना है।

​कुसुम कंडवाल ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के विज़न का उल्लेख करते हुए कहा कि विकसित भारत 2047 का मार्ग नारी शक्ति से ही होकर गुजरता है। केंद्र सरकार द्वारा बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ, महिला उद्यमिता, कौशल विकास और डिजिटल सशक्तिकरण के माध्यम से महिलाओं को केवल सहायता ही नहीं, बल्कि नेतृत्व के योग्य बनाया जा रहा है। उन्होंने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व की सराहना करते हुए कहा कि राज्य सरकार ने महिलाओं के आर्थिक, सामाजिक और प्रशासनिक सशक्तिकरण को सर्वोच्च प्राथमिकता दी है। राज्य में महिलाओं हेतु सरकारी सेवाओं में 30% क्षैतिज आरक्षण, सशक्त बहना, मुख्यमंत्री एकल महिला स्वरोजगार योजना और 3 लाख से अधिक लखपति दीदियों का तैयार होना ग्रामीण अर्थव्यवस्था और महिला स्वावलंबन का प्रत्यक्ष प्रमाण है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि महिला आयोग हर पीड़ित बेटी और महिला के विश्वास का संबल बनकर उनके साथ हमेशा खड़ा है।

​संस्थान के निदेशक प्रो. हरिद्वारी लाल मंडोरिया ने महिला आयोग का इस पहल के लिए आभार व्यक्त करते हुए कहा कि तकनीकी युग में जहां डिजिटल प्लेटफॉर्म्स ने जीवन को सरल बनाया है, वहीं साइबर स्टॉकिंग और निजता का हनन एक गंभीर सामाजिक व डिजिटल चुनौती बन चुका है। उन्होंने तकनीकी युवाओं से अपील की कि वे तकनीक का उपयोग ज्ञान व नवाचार के लिए करें, न कि उत्पीड़न के लिए, और किसी भी गलत गतिविधि पर मूकदर्शक न बनकर तुरंत सहयोग करें।

​कार्यक्रम में उपस्थित राज्य मंत्री किरन देवी एवं राज्य मंत्री हेमा जोशी ने अपने संबोधन में महिला आयोग की इस पहल की सराहना की। उन्होंने कहा कि सीमांत क्षेत्र टनकपुर में बेटियों को साइबर सुरक्षा, विधिक अधिकारों और डिजिटल सतर्कता के प्रति जागरूक करने के लिए यह एक अत्यंत प्रभावी, सामयिक और सराहनीय कदम है। उन्होंने कहा कि ऐसी कार्यशालाएं बेटियों के भीतर आत्मविश्वास भरने और समाज में सुरक्षा की संस्कृति को सुदृढ़ करने का कार्य करती हैं।

​तकनीकी एवं मार्गदर्शन सत्रों में आमंत्रित विषय विशेषज्ञों ने प्रतिभागियों को विभिन्न आयामों से जागरूक किया। ​साइबर स्टॉकिंग व तकनीकी रोकथाम सत्र में उपस्थित पुलिस उपनिरीक्षक कमलेश भट्ट ने स्टॉकिंग एवं साइबर स्टॉकिंग के दुष्प्रभावों और तकनीकी रोकथाम पर विस्तृत प्रकाश डाला। उन्होंने फर्जी अकाउंट्स, अनचाही ट्रैकिंग, ऑनलाइन पीछा करने से बचाव, सोशल मीडिया फ्रॉड तथा साइबर सेल व हेल्पलाइन के जरिए त्वरित शिकायत दर्ज कराने की प्रक्रिया को विस्तार से समझाया।

उप जिला चिकित्सालय, टनकपुर की सर्जन डॉ. प्रभा जोशी ने स्टॉकिंग, साइबर स्टॉकिंग और सोशल मीडिया के अत्यधिक दबाव से उत्पन्न होने वाले मानसिक तनाव, अवसाद व चिंता के प्रभाव पर चिकित्सकीय जानकारी दी। उन्होंने युवाओं को डिजिटल डिटॉक्स, मानसिक स्वास्थ्य संरक्षण तथा संकट के समय बिना संकोच चिकित्सकीय परामर्श लेने के लिए प्रेरित किया।

​महिला हेल्पलाइन प्रभारी, महिला उपनिरीक्षक सिमरन ने सोशल मीडिया पर व्यक्तिगत जानकारियों, फोटो, लोकेशन व पासवर्ड को सुरक्षित रखने की व्यावहारिक तकनीकें साझा कीं। उन्होंने छात्राओं को प्राइवेसी सेटिंग्स, टू-फैक्टर ऑथेंटिकेशन और किसी भी तरह के डिजिटल उत्पीड़न पर बिना झिझक पुलिस व महिला हेल्पलाइन से संपर्क साधने का कि जानकारी उपलब्ध करायी।

वन स्टॉप सेण्टर, चम्पावत की केन्द्र प्रशासिका व अधिवक्ता ऋतु सिंह ने पीड़िता को त्वरित शिकायत दर्ज कराने हेतु उपलब्ध विधिक सहायता तंत्र, साइबर अपराध कानूनों और भारतीय न्याय प्रणाली के कानूनी प्रावधानों की संपूर्ण जानकारी दी। उन्होंने वन स्टॉप सेंटर द्वारा महिलाओं को एक ही छत के नीचे मिलने वाली चिकित्सीय, कानूनी, आश्रय व मनोवैज्ञानिक सहायता की कार्यप्रणाली से अवगत कराया।

​कार्यक्रम का समापन उपाध्यक्ष सायरा बानो द्वारा धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ।

इस अवसर पर उत्तराखंड राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष ने लाभार्थियों को महालक्ष्मी किट भी वितरित की। कार्यशाला में प्रमुख रूप से उत्तराखण्ड राज्य महिला आयोग सदस्य रचना जोशी, जिला कार्यक्रम अधिकारी बृजवाल प्रकाश, निजी सचिव आधार वर्मा, रुचि धस्माना, दीपा जोशी, सुनीता मुरारी, बबीता गोस्वामी, तुलसी कुंवर, रीता कुलकोड़िया, सरोज चंद, बाल विकास परियोजना अधिकारी राजेंद्र बिष्ट एवं मोहन बिष्ट सहित संस्थान के शिक्षकगण, पुलिस-प्रशासन के अधिकारी तथा भारी संख्या में छात्राएं उपस्थित रहीं।

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