Saturday, October 24, 2026
Home ब्लॉग नेपाल की नई सरकार और भारत

नेपाल की नई सरकार और भारत

डॉ. एन. के. सोमानी
कम्युनिस्ट पार्टी नेपाल-माओवादी सेंटर (सीपीएन-एमसी) के मुखिया पुष्प कमल दहल उर्फ प्रचंड नेपाल के नये प्रधानमंत्री होंगे। रविवार को तेजी से बदले सियासी घटनाक्रम में उस वक्त नाटकीय मोड़ आ गया जब गठबंधन सरकार में शामिल प्रंचड पाला बदल कर ओली के खेमे में चले गए थे। दोनों नेताओं के बीच सरकार निर्माण के साथ-साथ प्रधानमंत्री पद के लिए प्रचंड के नाम की सहमति बनी। प्रचंड तीसरी बार नेपाल के पीएम बन रहे हैं। पहली बार 2008-09 और दूसरी बार 2016-17 तक नेपाल के पीएम रह चुके हैं।

नेपाल की 275 सदस्यीय प्रतिनिधि सभा के लिए नवम्बर में चुनाव हुए थे। चुनाव नतीजों में किसी भी दल को बहुमत नहीं मिला। मौजूदा प्रधानमंत्री शेर बहादुर देउबा की नेपाली कांग्रेस को सबसे अधिक 80 सीटें मिलीं। ओली की पार्टी को 78 सीट और प्रचंड की पार्टी को महज 30 सीटें मिली हैं। इसके बावजूद वे नेपाली कांग्रेस के साथ गठबंधन में पहले ढाई साल के लिए पीएम बनना चाहते थे। दूसरी ओर, नेपाली कांगेस सबसे बड़ी पार्टी के रूप में सरकार का नेतृत्व करने पर अड़ी हुई थी। उधर, राष्ट्रपति बिद्या देवी भंडारी द्वारा प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार के लिए निर्धारित समय सीमा रविवार को शाम पांच बजे समाप्त हो रही थी। देउबा के साथ बातचीत विफल होने के बाद प्रचंड प्रधानमंत्री पद के समर्थन के लिए कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ नेपाल-यूनाइटेड मार्क्सवादी लेनिनवादी (सीपीएन-यूएमएल) के अध्यक्ष केपी शर्मा ओली के निजी आवाज पर पहुंचे जहां दोनों नेताओं के बीच सरकार निर्माण के फार्मूले पर सहमति हुई।

सहमति की शर्त के मुताबिक सीपीएन-यूएमएल समेत छह पार्टियों के समर्थन से प्रचंड पहले ढाई साल के लिए नेपाल की कमान संभालेंगे और अगले ढाई साल के लिए सीपीएन-यूएमएल के नेता केपी शर्मा ओली नेपाल के पीएम होंगे। प्रचंड के ओली के गठबंधन में शामिल होने के बाद नेपाल की तीनों प्रमुख कम्युनिस्ट पार्टियों के नेता प्रचंड, ओली और माधव कुमार नेपाल एक खेमे में आ गए हैं। प्रचंड और ओली, दोनों भारत विरोधी माने जाते हैं। ऐसे में सवाल  है कि आने वाले दिनों में भारत-नेपाल संबंध किस दिशा में आगे बढ़ेंगे। यह सवाल इसलिए वाजिब लग रहा है क्योंकि अपने प्रचार अभियान के दौरान ओली कह चुके हैं कि अगर वे सत्ता में आते हैं, तो भारत के क्षेत्र कालापानी, लिपुलेख और लिम्पियाधुरा को वापस लेकर आएंगे। ये क्षेत्र सदियों से भारत के पास हैं। अब प्रचंड के साथ ओली सत्ता में हैं, तो निश्चित ही चुनावी वादा पूरा करने के लिए भारत के साथ तनाव को हवा देंगे। दूसरा, ओली की चीन परस्ती पहले से ही जग जाहिर है। हालांकि, नेपाली कांग्रेस के साथ काम करते हुए प्रचंड के भारत विरोध रुख में बदलाव आया है। फिर भी सवाल तो परेशान करता ही है कि अगर प्रचंड का चीन प्रेम जाग उठा तो भारत, नेपाल के रास्ते आने वाली रणनीतिक चुनौतियों से कैसे निबट सकेगा।

नवम्बर, 2019 में जब नेपाल में ओली की सरकार थी, उस वक्त कालापानी इलाके पर नेपाल ने दो टूक कह दिया था कि भारत को इस क्षेत्र से अपनी सेना हटा लेनी चाहिए। उस वक्त भी सवाल उठा था कि ओली की आक्रामक भाषा के पीछे कहीं चीनी मनसूबे तो काम नहीं कर रहे। हालांकि, 2014 में नरेन्द्र मोदी की नेपाल यात्रा के दौरान तत्कालीन नेपाली प्रधानमंत्री कोइराला ने कालापानी का मुद्दा उठाया था और कालापानी पर नेपाल का अधिकार बताते हुए इसे हल करने की अपील की थी। 1996 में कालापानी इलाके के संयुक्त विकास के लिए महाकाली संधि के तुंरत बाद नेपाल की कम्युनिस्ट पार्टियों ने कालापानी पर दावा करना शुरू कर दिया। उधर, चीन लंबे समय से इस इलाके पर कब्जा करने की कोशिश करता रहा है। चीन की शह पर ही नेपाल में जब-तब कालापानी को लेकर प्रदर्शन होते रहे हैं। यह वही जगह है जहां भारत 1962 के युद्ध में चीन के समक्ष मजबूती से डटा हुआ था। भारत को डर है कि अगर कालापानी नेपाल के अधिकार क्षेत्र में चला गया तो चीन वहां अपने पांव जमा लेगा। भारत की घेराबंदी में जुटे चीन की भी यही मंशा है।

चीन की महत्त्वाकांक्षी परियोजना वन बेल्ट वन रोड में सहयोगी होने और व्यापारिक हितों के कारण नेपाल का झुकाव भारत से कहीं अधिक चीन की ओर है। नवम्बर, 2019 में पीएम मोदी ने काठमांडू में हुए बिम्सटेक देशों के सामने सैन्य अभ्यास का प्रस्ताव रखा तो ऐन वक्त पर चीन के दबाव में नेपाल ने सैन्य अभ्यास में शामिल होने से इंकार कर दिया जबकि बाद में उसने चीन के साथ सैन्य अभ्यास में भाग लिया था। भारत और नेपाल के बीच भारतीय सेना की गोरखा बटालियन में गोरखा सैनिकों की भर्ती के मुद्दे पर भी तनातनी की स्थिति बनी हुई है। नेपाल नाराज है कि भारत सरकार ने सेना में भर्ती की अग्निपथ योजना को लेकर उससे चर्चा तक नहीं की। नेपाली विदेश मंत्री नारायण खडक़े नेपाल में भारतीय राजदूत नवीन श्रीवास्तव से मिलकर इस योजना के तहत नेपाली युवकों की भर्ती की योजना को स्थगित करने की मांग कर चुके हैं।

नेपाल का आरोप है कि अग्निपथ योजना नवम्बर, 1947 में भारत-ब्रिटेन एवं नेपाल के बीच हुए त्रिपक्षीय समझौते का उल्लंघन है। हालांकि, भारत ने नेपाल को आश्वस्त किया है कि अग्निपथ योजना के सारे फायदे, जो भारतीय युवाओं को मिलेंगे, नेपाल के गोरखाओं को भी हासिल होंगे। थल सेना प्रमुख जनरल मनोज पांडे की नेपाल की पांच दिवसीय यात्रा के दौरान इस मुद्दे को सुलझाने की कोशिश की गई थी लेकिन ऐसा नहीं हो सका। अब भारत ने भी दो टूक कह दिया है कि अगर नेपाली गोरखा अग्निवीर बनने के लिए नहीं आते हैं, तो उनकी खाली जगह को भारत में रह रहे गोरखाओं से भरा जाएगा। अभी 30 हजार से अधिक गोरखा भारतीय सेना में हैं। नेपाल में अग्निपथ योजना के तहत 1300 सैनिकों की भर्ती की जानी है।

हालांकि, भारत और नेपाल, दोनों समान संस्कृति और मूल्यों वाले पड़ोसी हैंं। इसके बावजूद दोनों देशों के संबंध निर्धारित दायरे से बाहर नहीं निकल पाए हैं, तो इसकी बड़ी वजह कहीं न कहीं नेपाल का चीन प्रेम ही है। ओली के समर्थन से बन रही नेपाल की नई सरकार भारत के साथ रिश्तों को किस तरह आगे बढ़ाती है, यह अगले कुछ दिनों में स्पष्ट हो जाएगा।

RELATED ARTICLES

आधुनिकता के अनेक सार्थक पक्ष भी हैं जो समाज को बेहतर बनाते हैं

भारत डोगरा आधुनिक समाज में अनेक स्तरों पर जटिलताएं बढ़ रही हैं। तकनीकी बदलाव तेजी से हो रहे हैं, और सामान्य जनजीवन पर उनका असर...

दक्षेस से भारत को सतर्क रहने की जरूरत

डॉ. ब्रह्मदीप अलूने महाशक्तियों की राजनीतिक और आर्थिक महत्त्वाकांक्षाओं ने तीसरी दुनिया के उभरने की संभावनाओं को सुनियोजित तरीके से खत्म कर दिया है। इसका...

एक अच्छे, भले और नेक प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह

हरिशंकर व्यास शीर्षक चौंका सकता है। पर जरा समकालीन भारत अनुभवों और उनकी दिशा में झांके तो अगले बीस-पच्चीस वर्षों की क्या भारत संभावना दिखेगी?...

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

- Advertisment -



Most Popular

बदलते शैक्षिक परिदृश्य में सकारात्मक दृष्टिकोण और नवाचार के साथ कार्य करें अधिकारी: अपर निदेशक गढ़वाल

उप शिक्षाधिकारियों की मंडल स्तरीय समीक्षा बैठक और अभिमुखीकरण कार्यशाला आयोजित पौड़ी-  शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली को अधिक प्रभावी बनाने और अधिकारियों को विभागीय योजनाओं...

पल्टन बाजार में सुबह 11 से शाम 7 बजे तक वाहनों का प्रवेश प्रतिबंधित

जनसुरक्षा एवं यातायात व्यवस्था को लेकर जिला प्रशासन सख्त व्यस्त बाजारों में अतिक्रमण के विरुद्ध अभियान, रेहड़ी-ठेली सहित सभी प्रकार के अतिक्रमण पर होगी प्रभावी...

इम्युनिटी मजबूत करने के लिए सिर्फ विटामिन C और D नहीं, इन पोषक तत्वों का सेवन भी है जरूरी

शरीर को संक्रमण और बीमारियों से बचाने में प्रतिरक्षा प्रणाली यानी इम्युनिटी की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। मजबूत प्रतिरक्षा प्रणाली शरीर को वायरस, बैक्टीरिया...

पुतिन का यूरोप पर तीखा हमला, बोले- रूस को हराने का सपना छोड़ दें देश, यूक्रेन युद्ध पर बातचीत के संकेत

पुतिन ने नवंबर में त्रिपक्षीय वार्ता को लेकर दिए संकेत मॉस्को। रूस और यूक्रेन के बीच जारी युद्ध को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कूटनीतिक हलचल...

Recent Comments

fapjunk
Antalya escort Antalya escort Belek escort
Antalya escort Antalya escort Belek escort
Ankara Escort
porn
Spanish to English translation is the process of converting written or spoken content from the Spanish language into the English language. With Spanish being one of the most widely spoken languages in the world, the need for accurate and efficient translation services is essential. Spanish to English translation plays a crucial role in various domains, including business, education, travel, literature, and more. Skilled translators proficient in both Spanish and English are required to ensure accurate and culturally appropriate translations. They must possess a deep understanding of both languages' grammar, syntax, idioms, and cultural nuances to convey the original meaning and intent of the source content effectively. Quality Spanish to English translation services help bridge the language barrier and facilitate effective communication between Spanish-speaking individuals and English-speaking audiences.spanishenglish.com
Spanish to English translation is the process of converting written or spoken content from the Spanish language into the English language. With Spanish being one of the most widely spoken languages in the world, the need for accurate and efficient translation services is essential. Spanish to English translation plays a crucial role in various domains, including business, education, travel, literature, and more. Skilled translators proficient in both Spanish and English are required to ensure accurate and culturally appropriate translations. They must possess a deep understanding of both languages' grammar, syntax, idioms, and cultural nuances to convey the original meaning and intent of the source content effectively. Quality Spanish to English translation services help bridge the language barrier and facilitate effective communication between Spanish-speaking individuals and English-speaking audiences.spanishenglish.com
uluslararası zati eşya taşımacılığı türkiyeden almanyaya ev taşıma uluslararası evden eve nakliyat türkiyeden kıbrısa evden eve nakliyat türkiyeden kıbrısa ev taşıma fiyatları türkiyeden ingiltereye evden eve nakliyat yurtdışına ev taşıma zati eşya taşımacılığı
Evden eve nakliyat şehirler arası nakliyat